
अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े आकलनों में यह सामने आया है कि चीन और पाकिस्तान अब भारत के खिलाफ सीधे युद्ध के बजाय एक नई रणनीति पर काम कर रहे हैं. इस रणनीति को ‘ग्रे-जोन वॉरफेयर’ कहा जाता है. यानी ऐसी कार्रवाइयां जिनसे लगातार दबाव बने, लेकिन खुली जंग की रेखा पार न हो. CNN-News18 की ओर से एक्सेस की गई रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस बदली हुई रणनीति का पहला बड़ा टेस्ट था. इसमें पाकिस्तान सामने से सक्रिय दिखा, जबकि चीन पर्दे के पीछे रहकर पूरी तस्वीर को नियंत्रित करता रहा.
ऑपरेश सिंदूर में चीन की कैसे मदद की?
अमेरिकी आकलन के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने जमीन पर दिखाई देने वाली सैन्य और प्रॉक्सी गतिविधियां संभालीं, जैसे सीमित सैन्य दबाव की भूमिका. वहीं चीन ने सीधे सेना उतारे बिना इन्फॉर्मेशन वारफेयर, साइबर एक्टिविटी, खुफिया सहयोग और कूटनीतिक चालों के जरिए पाकिस्तान की मदद की. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सैटेलाइट और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से पाकिस्तान को रियल-टाइम इनपुट मिले, जिससे उसकी टार्गेटिंग और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन बेहतर हुआ, लेकिन कहीं भी PLA की सीधी मौजूदगी नहीं दिखी.
पाकिस्तान के कंधे पर चीन की बंदूक
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चीन की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा था प्लॉसिबल डिनायेबिलिटी यानी जिम्मेदारी से बचने की गुंजाइश. जहां पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेलता रहा, वहीं चीन ने कूटनीतिक बयानबाजी और नियंत्रित ऑनलाइन कैंपेन के जरिए पाकिस्तान का नैरेटिव आगे बढ़ाया. इसका मकसद था भारत के दावों पर सवाल खड़े करना और भारत के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय समर्थन बनने की रफ्तार को धीमा करना. अमेरिकी आकलन इसे भारत की एस्केलेशन लिमिट परखने की जानबूझकर की गई कोशिश मानते हैं.
